
मित्रों! उदाहरण में आज आपके सामने हैं निशांत। एक ऎसे कवि जो तड़क-भड़क प्रदर्शन और छपास-चर्चा रोग से दूर राजस्थान के एक छोटे से गांव में बरसों से अनवरत अपने रचनाकर्म में लगे हैं। निशांत का कवि बिना किसी भारी-भरकम तामझाम वाले शब्दजाल के सीधे अपने समय को व्यक्त करता है और जो आलोचक सरल अभिव्यक्ति को कविता के रूप में खारिज़ करते हैं उनके मानद्ण्डों लिए सवाल खड़े करता है।
निशान्त(रामजी लाल) जन्म: 1949पीलीबंगा (हनुमानगढ़) राजस्थान,कुछ प्रमुख- कृतियाँ धंवर पछै सूरज (राजस्थानी), झुलसा हुआ मैं, समय बहुत कम है, खुश हुए हम भी (हिंदी कविता संग्रह)
संपर्क-निशान्त,वार्ड नं. 6,निकट वन विभाग,पीलीबंगा-335803
जिला- हनुमानगढ़ (राजस्थान) फोन- 01508-235616
निशांत की कविताएं
संगीत सुनें
संगीत सुनें
आओ ! संगीत सुनें
चलती चक्की का
संगीत सुनें
झाडू का संगीत सुनें
बिलौने का संगीत सुनें
संगीत सुनें
धुलते कपड़ों की
थप ! थप ! का
कुत्तर करते
टोके की
कट ! कट ! का
खाती की
ठक! ठक! का
ऐंरण और हथौड़े का
सिल पर घिसती
रांपी का
जमीन काटते
फावड़े का
कपड़ा बुनती
खड्डी का
संगीत सुनें
आओ! संगीत सुनें!
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टूट-फ़ूट
काम चाहे
कितना ही पक्का
पुख्ता हो
बिगाड़ आ ही
जाता है उसमें
निभाता नहीं वह
उम्र भर साथ
मसलन
घिस जाते हैं
मैन गेट के
‘गेटवाल’
गल जाती है
बिजली की तारें
उखड़ जाता है
पलस्तर
यहां तक कि
अच्छे खासे
रिश्तों में भी
आ जाती है
दरार
कुछ भी नहीं होता
ऐसा
जो हमें कर दे
पूर्ण निश्चिंत
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सुबह
दिन की शुरुआत
होती है
सुन्दर- सुहानी
जैसे पिता कोई
लुभाए अपने बच्चे को
स्कूल भेजने को
फिर तो उसे होता है
दिन भर तपना
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रंगीन पत्थर
स्पंदन होता था कभी
इनमें भी
पथराए थे जब कभी
देख रहे होंगे
कुदरत का ऐसा ही
रंग कोई!
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ऐसा भी
कभी कभी
जब हम
हँस रहे होते हैं
दुःख छुपकर
हम पर
हँस रहा होता है।
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4 comments:
मैं इनकी सरलता से चमत्कृत हुई.. बहुत सुन्दर लगी.सब रचनाएं
सहज और सरल अभिभूत हूँ...
गेटवाल, बिजली की तारें, पलस्तर या अच्छे खासे रिश्ते, वाह क्या तुलना है. आम दुनियावी पदार्थों का अद्भुत सामंजस्य जोड़ा है रिश्तों से. कोई भी कविता पढ़ लीजिये शब्दों में साफगोई है.
behad sahaj aur sarthak kvita. shabdonki shajta man ko sahlati haii.
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